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Movie Story – Narnia (नार्निया)

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Movie Story – Narnia (नार्निया)    

     नमस्कार दोस्तों । कार्टून बाबा वेबसाइट पर आपका स्वागत है। यह लेखन सी एस लुईस द्वारा लिखी गयी काल्पनिक उपन्यास नार्निया के वारे में है जो  १९५० में प्रकाशित की गयी थी।  यह 7 पार्ट  में है  जो  १९५०-१९५६ तक प्रकाशित की गयी।  सी एस लुईस द्वारा लिखी गयी कहानियां अति रोमांचित है । और  यह कहानी पढने पर आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है यह  ८ से ८०  तक हर उम्र के लोगों को आनन्दित और रोमांचित  करेगा । सी एस लुईस द्वारा लिखी गयी उपन्यास को  २००५  में सिनेमा घरों में रिलीज़ किया गया ।

       यह मूवी   जब में पहली बार देखा बहुत ही आश्चर्य चकित रह गया। क्यूँ की इस मूवी की एनीमेशन इतना  ज़बरदस्त था की मन को लुभा ले जाता था। फिल्म के सारे किरदार  बहुत ही अच्छे से प्ले  कर रहे थे। 

       आज  में  यह लेखन  २०२३ में लिख रहा हूँ जब की मूवी  २००५ में रिलीज़  हुई थी । १८ साल बीत गये यह मूवी आज भी अच्छी लगती है। इसलिए नहीं की इसका एनीमेशन , ड्रामा  और एक्शन अच्छा था। 

      यह मूवी दुशरों के लिए शिखणीय है। कैसे अन्याय और अत्याचार से लड़ते हुए,  जित हमेशा न्याय के साथ हुआ । और शांति से सब खुशाल बनते दिखे। जो लोग इस मूवी को देख चुके ठीक है। लेकिन आने वाली पीढ़ी को इसे जरूर देखना चाहिए। इस लेखन को कोई पढ़ कर इस मूवी को देखेगा तो मेरा लेखन  का सार्थक पूरा हो जायेगा।    

      आईये बढ़ते हैं कहानी की और।  

         यह कहानी शुरू होती है दूशरे विश्व युद्ध के  समय से । एक घर में पीटर, सुजैन, एडमंड और लूसी चारों भाई बहन अपने माँ के साथ रहते है। जब इंग्लैंड के सहर के ऊपर बम गिराए जाते है तब वह भागते हुए बेसमेंट में छूप जाते है। लेकिन इस दौरान एडमंड अपने पिता की तस्बीर याद आती है जो इनके पिता युद्ध में सामिल हुए है।

         और उसे लेने के लिए घर के तरफ भागा चला जाता है । उसको बचाने के लिए उसका बड़ा भाई पीटर उसके पीछे पीछे भागता है। अचानक एक बम घर के पास गिरता है और वह दोनों जमीन पर गिर जाते है। लेकीन  वह दोनों सुरक्षित होते हैं । बड़ा भाई पीटर  गुस्से से बोलता है “कब बड़ों की बात सुनोगे”। उसके बाद उनकी माँ सारे बच्चों को सहर के बहार भेजना चाहती है । अगले सुबह स्टेशन में सारे बच्चों को अपने रिश्तेदारों के यहाँ भेज देती है।

        इसके बाद उन चारों एक स्टेशन पर उतर जाते है । उन्हें चारों को लेने के लिए मिस मिक्रेडी नाम की लेडी वहां आती है और उनको ले  जाती है। वह उन चारों को  एक प्रोफेसर के यहाँ ले  जाती है । और समझाती है की यहाँ की कोई भी चीज बिना पूछे छूना मत और शोर-सराबा  बिलकुल नहीं । सबको नियमों का पालन करना होगा।

       सब कमरे की और चले जाते है और  चुपचाप से बैठे होते हैं।  तभी सबसे छोटी बहन सबको छुपा-छुपी खेलने के लिए बोलती है और सब राजी हो जाते  हैं। पीटर १ से १०० गिनती शुरु करता है। सब छुपने के लिए यहाँ वहां जगह ढूढ़ने  लगते है। लूसी एक कमरे में जाती है । वहां एक अलमारी सफ़ेद रंग के कपडे से ढका हुआ था उधर घुस जाती है।

जादुई अलमारी  – Movie Story – Narnia (नार्निया) 

अंदर घुसते ही एक अलग दुनिया में पहुँच जाती है। वह देखती है की चारों तरफ बर्फीले जंगल। यह उसको रोमांचित करती है वोह बर्फीले दुनिया में आगे की और बढ़ती  जाती है। आगे बढ़ते ही उसे एक अजीब सा प्राणी को देख कर डर जाती है । जिसका आधा भाग इन्सान का और आधा भाग  जानवर का होता है ।

       वह  एक दुसरे को देखकर डर जातें हैं। वह दोनों अपने जगह छूप जाते है। फिर बाद में उन दोनों की बिच बात चित शुरु हो जाती है। वह अजीब प्राणी बोलता है की “ में एक फौंन हूँ मेरा नाम टमनस है । तुम कौन हो। ” तब लूसी बोलती है की   “में के इन्सान हूँ । और मेरी नाम लूसी है” । वह फौंन लूसी को  अपने घर बुलाता है चाय पिने के लिए । लूसी राजी हो जाती है।

       टमनस बोलता है की ये नार्निया है। यहाँ हमेसा बर्फ गिरती रहती है और कभी भी ख्रीष्टमस मनाया नहीं जाता है। टमनस बोलता है की उसे धुन सुनना चाहिए, जो उसी धुन से सारे फौंन परीयों के साथ सारी रात नाचते थे। लूसी बासुरी की धुन से कुछ देर  सो जाती है। कुछ देर में लूसी की आंख खुल जाती है। अब घर जाने के लिए तयारी करती है।

       टमनस बोलता है की अब बहुत देर हो चूकी है । इस जंगल कि महारानी वाइट विच रहती है। उसने बोली थी की जो भी इन्सान की बच्चा दिखाई पड़े तो उसको हवाले कर दे । टमनस मन में दया आई और लूसी को लेकर वहां छोड़ दिया जहाँ पहले मुलाकात हुई थी। लूसी वहां से अलमारी में चली आती है। वहां से लौट कर अपने सारे भाई बहनों को सारी बातें बता देती है। लेकिन किसी ने भी उसकी बातों का विश्वास नहीं किया। लूसी उनको अलमारी के पास ले जाती है  पर उनको वहां कुछ नहीं मिलता है। लूसी दुखी हो जाती  है।

       लूसी को रात में उस जंगल के वारे में सोच रही थी की मोमबती लेकर उस अलमारी के पास जाती है। एडमंड उसके पीछे पीछे चला जाता है। एडमंड जैसे ही अलमारी के अन्दर जाता है तो वह नार्निया में पहुँच जाता है और अपने बहन को ढूँढने लगता है। वह जगह एक दम से बर्फीले जगह होता है।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – शैतान महारानी वाइट विच

     एडमंड अलमारी से एक बड़ा सा कोट लेकर यहाँ वहाँ उसकी बहन को पुकारता है। तभी एक टांगा आते हुए  दिखाई देता है। वह टांगा उसके पास रुक जाता है । उसमे से  एक बोना आदमी बहार निकल कर  एडमंड पर हमला कर देता है। 

   लेकिन नार्निया की सैतान महारानी वाइट विच उस बोने को हमला करने से मना कर देती है।  और बोलती है “तुम कौन हो ?  यहाँ क्या कर रहे हो ? ” एडमंड ने बोला “मैं अपनी बहन की तलास में हूँ जो यहाँ आई है और वह किसी टमनस के बारे में बोल रही थी” ।

         महारानी वाइट विच उसे जादू से  गरम चाय पिलाती है और कुछ मिठाइयाँ खिलाती हैं। और उसे बहला  फुसला कर नार्निया का राजा बनाना चाहती है। वह और उसके साथ चार भाई बहन को अपने साथ महल मैं ले आने के लिए आमंत्रित करती है जो दो पहाड़ी के बिच मैं है।

    महारानी वाइट विच अपने रास्ते चली जाती है । एडमंड का नेचर अपने अन्य भाई बहन से अलग होता है। वह लालची और झूठा होता है , बड़ों का बात नहीं मानता है। तभी लूसी वहां पहुँच जाती है।  वह खुस हो जाती है । अभी लूसी को लगता है की सब उसके ऊपर यकीन करेंगे। वह दोनों वापस चले जाते है ।

     लूसी यह बात अपने बड़े भाई को बता देती है की अलमारी के पीछे बर्फीले दुनिया है , और उसका साक्षी एडमंड है । जब एडमंड को पुछा जाता है तो वह  बोलता है की “छोटी बच्ची  कहानियाँ बनाना कब बंद करेगी”। लूसी को बहुत दुख हुआ वह रोते रोते अपने कमरे में जाने वाली थी की प्रोफेसर से टकरा जाती है। लूसी उनको पकड़ कर रोने लगती है। इसके बाद प्रोफेसर इसके वारे में  पीटर और सुजैन  से बात चित करते हैं। और बोलते है की अपने बहन की बातों का भरोसा करे।

        अगले ही दीन चारों भाई बहन क्रिकेट खेलते  है। खेलते खेलते बल सीधा जाकर शिसे की खिड़की से टकराती है और टूट जाती है। वह सब डर जाते है। मिस मिक्रेडी की गुस्से से बचने के लिए वही खाली कमरे वाली अलमारी में घुस जाते हैं । और सीधे नार्निया के जंगल में पहुँच जाते हैं। पीटर  और सुजैन  यह देखकर  चौंक जाते है ।

      सुजैन घर वापस जाने के लिए कहती है पर  एडमंड जंगल में घुमने के लिए बोलता है । क्यों की लालची एडमंड  नार्निया की महारानी से मिलना चाहता है। पीटर  बोलता है लूसी जो बोलेगी  हम वही करेंगे। लूसी बोलती है की वह टमनस के यहाँ मिलकर आये। वह चारों  टमनस घर की तरफ  रवाना होते हैं। जब वहां पहुँचे तो देखा  टमनस वह नहीं था ।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – टमनस को नार्निया से गद्दारी

        सारा घर बिखरा हुआ पड़ा था। उन्हें एक दिवार पर टंगा हुआ पत्र मिलता है की , जिस पर लिखा होता है की  टमनस को नार्निया से गद्दारी करने की सजा मिली है। उसने इंसानों के साथ दोस्ती की और उन्हें बचाया । यह सब बात पढ़ कर सब डर जाते हैं। सुजैन वापस घर जाने के लिए  बोलती है। लेकिन लूसी बोलती है की  “टमनस को मदद की जरुरत है । क्यूँ की वह इन्सान मैं हूँ “।

 उस समय झाड़ियों से आवाज आती है । वहां एक ऊदबिलाव आता हुआ दिखाई दिया । ऊदबिलाव लूसी को एक रुमाल देता है जो लूसी ने टमनस  को दिया था। ये ऊदबिलाव बात करता है और सभी चौंक जाते है।  वह उन सब चारों को अपने घर को ले जाता है । और भविष्यवानी पर बताता है जिसके हिसाब से ये चारों  नार्निया के लोगों को जादूगर महारानी से आजादी दिलाएंगे ।

         और असलान  के वारे में बोलता है जो असली में  नार्निया के राजा है । ऊदबिलाव की पत्नी बोलती है कि “बहुत सालों पहले एक भविष्यवानी हुई थी आडम के दो बेटे  और ईव की दो बेटीया वाइट विच को हरा कर  नार्निया में अमन कायम करेंगे”।  लेकिन पीटर मना  कर देता है और  घर वापस जाने के लिए तयारी करता है ।

          वह अपने छोटे भाई को आवाज देता पर वह वहाँ नहीं होता है  क्यूँ की वह वाइट विच के महल की और जा चुका था। वह देखेते है की एडमंड  वाइट विच के महल  के दरवाजे के पास पहुँच जाता है । पीटर उसको वापस लेने के लिए तयार होता है की  ऊदबिलाव उसे रोक देता है,और बोलता है  “यह  वाइट विच  की चाल है । वहां जायोगे तो सारे मारे  जायोगे । लेकिन एक रास्ता है वह है असलान,  जो तुम्हारे भाई को बचा सकता  है”।

 दूसरी तरफ एडमंड महल में घुसता है । तभी वह देखता है की  बड़े बड़े  पत्थर के मूर्तियां  होती हैं। लगता है की पूरी सेना को किसिने पत्थर का बना दिया । तभी उसका पैर एक भेड़िया के ऊपर पड़ता है। भेड़िया उसे जमीन पर गिरा देता है । भेड़िया उसे बोलता है “तुम कौन हो “। एडमंड  बोलता है की महारानी ने उसे मिलने के लिए बुलाया है।

         उसके बाद  भेड़िया  एडमंड  को वाइट विच के पास ले जाता  है।  वाइट विच  चिलाकर बोलती है की “तुम अपने साथ भाई बहनों को क्यूँ साथ नहीं लाये”।  एडमंड डर जाता है । और बोलता है की “ मैंने कोसिस की थी पर वह नहीं आये और वह सब ऊदबिलाव के घर  पर है”।  यह सुनकर  वाइट विच थोडा  शांत होता है  और भेड़िया को एडमंड की भाई बहनों को मारने के लिए भेजती है। एडमंड को बंदी बना लेती है।  पीटर  और सुजैन ऊदबिलाव के घर मैं थे । सब बहार जाने की तयारी में थे ।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – भेड़ियों का हमला

                तभी अचानक भेड़िया ऊदबिलाव के घर पर हमला कर देते है । ऊदबिलाव उन तिनी भाई बहनों को एक गुप्त रास्ते की तरफ ले जाता है। जब भेड़िया अन्दर आते है तो कोई भी नहीं मिलता ।

    जब सुरंग के दुसरे तरफ निकल जाते है तभी उन्हें एक लोमड़ी  दिखाई देता है। वह लोमड़ी बोलता है की तुम सब पेड पर चढ़ जाओ भेड़िये तुम्हे मारने के लिए  यहाँ आ रहे है। तभी सभी भेड़िया वहां पहुँच जाते है और लोमड़ी पर हमला कर देते है । भेड़िये पूछते है की इन्सान की बच्चे कहाँ गये ?  लोमड़ी झूठ बोल देता है की वह सब उत्तर की और गये है। उसके बाद सब भेड़िये उत्तर की तरफ भागते है।

जहाँ दूसरी तरफ एडमंड को  बंदी बना के रखा है वहां टमनस भी होता है । वाइट विच बंदी गृह में आती है और गुस्से से बोलती है की  तुम्हारा परिवार कहीं नहीं मिला तुम मेरे किसी काम के नहीं हो ।

    इतने में ही वाइट विच एडमंड के ऊपर हमला करने वाली होती है की एडमंड बोलता है की ऊदबिलाव किसी असलान का नाम लिया था और वहां जाने की तयारी कर रहे थे। यह सुन कर वाइट विच चौंक जाती है। वाइट विच  टमनस को बोलती है “तुम क्यूँ इधर हो जानते हो ? क्यूँ की तुम्हारी खबर एडमंड ने दी थी वह भी चॉकलेट की खातिर”। टमनस उसे हैरानी से उसे देखता है। एडमंड शर्म से अपना सर झुका लेता है।

        उधर  ऊदबिलाव वह तीनों  भाई बहन को लेकर असलान के पास जाना चाहती है। तभी पीछे से एक टांगा की आवाज सुनाई देती है।  सब डर के मारे भागते है और एक छोटी से गुफा में घुस जाते है।  थोड़े देर के  बाद  ऊदबिलाव सब को बहार निकलने  लिए बोलता है। तभी उनको एक सांता दिखाई देता है। सांता बोलता है “तुम लोगों को आ जाने से वाइट विच  की ताकत कमजोर पड़ रही है। सांता बोलता है की यहाँ  १०० सालो तक ख्रीष्टमस मनाया नहीं गया है ।

          अब धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा”। सांता लूसी को जडीबुटी वाली एक दवा देता है । जो जखम पर लगाते ही जखम जल्दी से भर जायेगा ।  सांता  सुजैन को तीर कमान और एक पुंगी देता है जिसे बजाने पर मदद मिल जाएगी। और सांता पीटर को  एक धारदार  तलवार देते है । सांता सब को मेरी ख्रीष्टमस बोल कर वहां से चला जाता है।

         वहां से आगे निकलने पर वाइट विच के भेड़िए उनका पिछा करते है।  पीटर, सुजैन नदी के रास्ते  पार कर रहें होते है की भेड़िये उन पर हमला कर देते हैं।  लेकिन पीटर के सूझ बुझ के कारण  सब को सुरक्षित बाहर ले आता है। धीरे धीरे बर्फ पिघलना शुरु  होता है । पेड़ पौधोमें फूल खिलना शुरु हो जाता है।  यह बसंत की आगमन का है।

         उधर वाइट विच नदी के पास पहुँच जाति है।  भेड़िये  वह लोमड़ी को पकड़ कर  वाइट विच के पास ले आते है। वाइट विच लोमड़ी को मारने वाली होती है की एडमंड बिच में आ जाता है और  स्टोन टेबल के बारे में  बोलता है।

और यह भी बता देता है की  असलान की खुद की एक सेना है । यह सुनकर  वाइट विच हैरान हो जाती है और लोमडी को जादू से पत्थर बना देती है। वह भेड़ियों को आदेश देती है की “सारी सेना को इकट्ठा करो । असलान को जंग  पसद है तो  जंग का जवाब जंग से ही देंगे “।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – असलान से मिलना

 वहिं  दूसरी तरफ पीटर, सुजैन,  लूसी  और  दोनों  ऊदबिलाव  असलान  के पास  पहुँच जाते हैं। द्वार पर एक  अश्वमानव खड़ा हुआ दिखाई देता है जो आधा इन्सान और  आधा घोडा होता है।  तभी पीटर  बोलता है की वह असलान से  मिलने के लिए यहाँ  आया है। तभी असलान अपने टेंट से  बहार निकल आता है ।

      जो एक बब्बर शेर होता है। सभी जानवर अपने घुटनों पर झुक जाते है । असलान का स्वागत करते है। असलान  पीटर, सुजैन,  लूसी  और  दोनों  ऊदबिलावयों को   स्वागत करता है और पूछता है की उसका छोटा भाई कहाँ है। पीटर कहता है की  एडमंड  वाइट विच के कब्जे में है। असलान बोलता है की उसके छोटे भाई को छुड़ाने के लिए  मदद  करेगा लेकिन  उसके बदले पीटर को जंग में मदद करनी होगी।

        उधर वाइट विच के भेड़िये  सुजैन और लूसी पर हमला कर देती है ।  असलान , पीटर  सब भेड़ियों को मार देते हैं।  और एक को छोड़ देते है। असलान उसके सिपाहिको पीछा करने के लिए  बोलता है। असलान के सिपाहि भेड़िये का पीछा करके एडमंड को छूड़ा कर ले आते  है। एडमंड को देखकर सब खुस हो जाते है।  असलान बोलता है की अब जो भी हो गया इसके वारे में  कोई बात नहीं करेगा।

       अगले दिन वाइट विच असलान को मिलने के लिए आती है। वाइट विच बोलती है की “तुम्हारे बिच एक गद्दार है, उसको मुझे सौंप दो।  उसका खून मेरी सम्पति है ।अगर नहीं दिए तो पूरा नार्निया  आग  और पानी के कहर से तबाह हो जायेगा”।  नार्निया में एक कानून है जो भी गद्दारी करेगा  उस पर सिर्फ वाइट विच का हक होगा। 

         इसके बाद असलान वाइट विच को अपने टेंट में  बात करने के लिए बूलाता है। कुछ देर बाद  वह दोनों बाहर निकल आते है । असलान कहता है की वाइट विच ने एडमंड  की जान बक्स दी है। सभी खुस हो जाते है। वाइट विच वहां से चली जाती है , और असलान  खामोस हो जाता है। लूसी समझ जाती है की जरूर कुछ ना कुछ बात है।

         उसी रात असलान कहीं जा रहा होता है।  लूसी और सुजैन उसके पीछे दूसरी  रास्ते से उनका पीछा करते है।  वह दोनों देख कर हैरान हो जाते है। असलान उस स्टोन टेबल के पास जाते है जहाँ पहले से ही  वाइट विच और उसकी सेना पहले से होती है।  वाइट विच के इशारे पर  असलान को रसि से बांध देते है। उसके सारे बाल काट देते है।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – असलान की क़ुरबानी

        वाइट विच बोलती है की “क्या तुम अपनी जान क़ुरबानी दे कर  उस गद्दार को बचालोगे? तुम ऐसा कर के किसी की भी जान बचा नहीं पाओगे। अब हम नार्निया पर राज करेंगे” । यह कहते हुए  वाइट विच एक खंजर से  असलान को मार देती है। वाइट विच  आदेश देती है जंग पर निकले की तयारी करो।  उसके बाद वाइट विच और उसकी सेना असलान को छोड़ कर चली जाती है।

         इसके बाद लूसी और सुजैन असलान  के पास पहुँचते है।  लूसी  उसी जडीबुटी को असलान के घाव पे लगाती है  जो सांता ने उसे दिया था ।  सुजैन बोलती है की अब  कुछ फायेदा नहीं। लूसी असलान को पकड़ कर रोने लगती है। जब यह बात सबको पता चलती है तो सब परेसान  हो जाते हैं।  एडमंड  बोलता है पीटर को की तुम्हे असलान की जगह लेना चाहिए । उसे तुम पर भरोसा था और  मुझे भी है। एडमंड की बात सुनकर पीटर को हिम्मत आता है।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – असलान और वाइट विच के बिच  युद्ध

      इसके बाद  वाइट विच  के सेना वहां पहुँच जाती है।  असलान की सेना  और वाइट विच  की सेना  के बिच  युद्ध  शुरु हो जाता है। वही दूसरी तरफ सुजैन और लूसी  स्टोन टेबल के पास उठकर जाने वाली होती है।  तभी स्टोन टेबल टूट जाता है। जब वह पीछे देखती है असलान का शरीर नहीं  होता। तभी असलान उनके आगे खड़ा हुआ दिखाई देता है।   

         दोनों खुस होकर  असलान को गले लगाती है। असलान बोलता है की “अगर  स्टोन टेबल पर किसी निर्दोष को मारा जायेगा तो स्टोन टेबल  टूट जायेगा। जिसे मारा है वह जिन्दा हो जायेगा । जादूगरनी को जादू के वारे में सही मतलब नहीं पता”। फिर असलान लूसी और सुजैन को अपने पीठ पर बिठा कर वाइट विच  की महल की और ले जाता है।

       लूसी और सुजैन  सबको पत्थर का बना हुए देखकर चौंक  जातें है । असलान फूंक से सबको पहले के जैसा  सबको बना देता है।  सबको आजाद कर देते है। पूरी सेना को लेकर  युद्ध के मैदान की तरफ बढ़ते है। युद्ध में वाइट विच  अपने जादू से सबको पत्थर बना देती है ।

    जब पीटर की सेना हार रही होती है की , पीटर एडमंड से बोलता है की तुम अपने बहन को लेकर  यहाँ से भाग जाओ।  ऊदबिलाव एडमंड को लेकर वहां  से  जाने वाला होता है की , वाइट विच  पीटर के ऊपर हमला कर देती है। एडमंड पीटर को बचाने के लिए वाइट विच  के ऊपर हमला कर देती है। एडमंड  वाइट विच  की हतियार को काट देता है जो सब को पत्थर का बना देता है।

         वाइट विच   बहुत ताकतवर है वह एडमंड को अपने तलवार से  घायल कर देती है। पीटर यह देखता है तो  पीटर को गुस्सा आता है । इसके बाद वाइट विच   और पीटर की बिच लड़ाई होती है। तभी असलान मैदान में  दहाड़ लगाकर पहुँच जाता है।  वाइट विच  यह देखर बोलती है की  “यह नहीं हो सकता। ” क्यूँ की उसने असलान को मार दिया था। असलान के साथ साथ  असलान की पूरी सेना वहां पर होती है। जिन्हें वाइट विच  ने कभी पत्थर का बना दिया था।

Movie Story – Narnia (नार्निया) – वाइट विच का  आक्रमण

         पीटर असलान को देखकर खुस हो जाता है । वाइट विच  मौके का फायेदा उठाकर  पीटर पर हमला  कर देती है । उसे घायल कर के जमीन पर गिरा देती है।  जैसे ही पीटर को मारने वाली होती है  की असलान भागता हुआ आता है वाइट विच  पर हमला कर के उसे मार देता है।

     उसके बाद  वाइट विच  की सेना  वहां से फरार हो जाती है। असलान बोलता है लड़ाई अब खत्म हुई। लूसी घायल एडमंड को जडीबुटी वाली दवा पिलाती है और एडमंड ठीक हो जाता है। लूसी सारे घायल सिपाहियों वह दवा पिलाती है। असलान भी पत्थर बने हुए सभी लोगों को ठीक कर देता है। 

      इसके बाद असलान इन सब को महल ले जाता है। इन चारों भाई बहनों को राजा रानी के ताज पहनाते है।  असलान ने अपने जिमेदारी पूरी करने के बाद चुपचाप वहां से चला जाता है।  इसके बाद दिन चला जाता है  समय बितता जाता है चारों भाई बहन बड़े हो जाते है। एक दिन उसी जगह आते है जहाँ से कभी  नार्निया आये थे।

       उसी अलमारी के अन्दर चले जाते हैं । जब वह अलमारी के दुसरे कमरे में पहुँचते हैं  यह  सब उसी उम्र के हो जाते है की  जिस उम्र में  वह  नार्निया में  आये थे। हालाँकि नार्निया में बहुत साल बीताये लेकिन  जब वह अलमारी से अपने कमरे में आये  तो उसी दिन उसी वक्त में पहुँच जाते है। 

     अब जब सब वापस आ जाते है  तभी वहां प्रोफ़ेसर  आते है । प्रोफेसर बोलते हैं की “अलमारी में  क्या कर रहे थे”।  पीटर बोलता है की “में आपको बताऊंगा तो आप को यकीं नहीं होगा” । प्रोफेसर उनको बोलते  हैं की “कहके तो देखो”।

यह थी नार्निया की कहानी उमीद करता हूँ  की आप को पसंद  आया होगा।  तो मिलते है अगले एक धमाकेदार कहानी के साथ । 

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Best hindi story Saap aur Lakdi Chor – सांप और लकड़ी चोर

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Best hindi story सांप और लकड़ी चोर

रामपुर नाम का एक छोटा सा गांव था। वह गांव देखने में बहुत खूबसूरत है। गांव के चारों ओर बड़े-बड़े पहाड़ है। यह गांव घने जंगल से घिरा हुआ है। और गांव के पूर्व हिस्से में एक तालाब में कमल फूलों से भरा है।

उस गांव में कई समुदाय के लोग रहते हैं। वे दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर के अपना जीवन यापन करते हैं।

एक दिन की बात है। उस गांव में दो सपेरे आए सांप का खेल  दिखाने के लिए । उन्होंने सांपों को गांव के बीच में रखा और लोगों को दिखाया। जब लोग सांप देखते हैं तो उन्हें पैसे मिलते है।

वे अपने टोकरी में कई तरह के सांप रखते हैं। ये कई प्रकार के होते हैं जैसे नाग, अहिराज, अजगर। उन सांपों में अजगर सबसे बड़ा है। उस सांप को देखकर हर कोई हैरान और डर जाता है। वे सपेरों ने एक सप्ताह तक वहीं रहें।

उस गांव में, दिलीप बाबु शहर से आये थे और एक कॉफ़ी बगीचा लगाया और वहीं रहने लगे। उन्होंने सपेरों से बात की । बातचीत के बीच में उन्होंने पूछा कि सपेरों का घर कहां है? उन्होंने कहा कि उनका गांव मणिपुर है। दिलीप बाबु के पिता का घर भी मणिपुर है ।

लेकिन उनकी पढ़ाई शहर में हुई। ये  सुनकर दिलीप बाबु बहुत खुश हुए। दिलीप बाबु एक अच्छा इंसान, दयालु, सच्चा, ईमानदार और उदार व्यक्ति हैं। उन्होंने  उन सपेरों को गांव की छोटी सी दुकान से कुछ सस्ते दाम पर सामान खरीद के दिया। सपेरें बहुत खुश हो गये।

दिलीप बाबु ने उन सपेरों से सांपों को लाकर उनके घर के पास दिखाने को  कहा। सपेरों ने जाकर उन्हें एक-एक करके दिलीप बाबू को सांप दिखाया। सांप को देखकर वह खुश हो गये। इस समय के दौरान  एक आदमी उन के पास आया और उन्होंने मजाक में कहा “सांप अकेले देख रहें हैं। क्या आप सांप खरीदेंगे?” दिलीप बाबू ने मजाक करते हुए कहा, “हां, मैंने खरीद लिया।” आदमी हैरान हो गया।

उन्होंने कहा, “क्या यह सच है, दिलीप बाबु ?” दिलीप बाबु ने कहा, “हां, यह सच है।”

“किस सांप को”? आदमी ने कहा। दिलीप बाबु ने कहा ‘अजगर सांप’।

तब वह आदमी हैरान हो कर दौड़ा। गांव में चिल्लाकर कहा कि “दिलीप बाबु ने सांप खरीद लिया ।” । गांव के लोग आश्चर्यचकित हो गये।

गांव वालों ने पुछा दिलीप बाबु क्या आपने सांप ख़रीदा है और क्या करेंगे उस सांप को ? दिलीप बाबु ने कहा में उस सांप को बगीचे में छोडूंगा।

गांववालों चिंतित थे। क्योंकि वे बगीचे में लकड़ी, पत्ते, फल, फूल आदि चुरा लेते थे, अब ऐसा नहीं हो सकेगा ! जल्द ही यह कहानी गांव भर में फैल गई।

यह बातें सबके कानों में पड़ा। हर कोई डर गया था। और कोई बगीचे में नहीं गया। इसके बाद फूल सुरक्षित रहे। लेकिन दिलीप बाबु के पिता का नौकर रामू काका इन सब बातों के बारे में जानते थे। ऐसे ही कुछ दिन बीत गए।

गांव वाले कभी-कभी रामू काका से पूछते हैं, “सांप क्या खा रहा है?”  रामू काका कहते है कि वह एक ही समय में दो मुर्गी के अंडे निगल रहा है और वापस बगीचे में चला जाता है ! वहीं एक अन्य व्यक्ति पूछता है, “क्या सांप खाली बगीचे में रहेगा?” रामू काका कहते हैं, “हां, रहेगा, वह एक मंत्र तंत्र से बंधा हुआ है।“

रामू काका ने फिर कहा “अभी सांप छोटा है। अगले दो महीनों में वह बड़ा हो जाएगा और बड़े-बड़े लोगों को भी खा जाएगा।“ इससे लोग ज्यादा डर गये।

लोगों को बहुत दुःख होता है। क्योंकि लोग बगीचे में जाकर पत्ते, फल और फूल नहीं ले सकते।

रामू काका कोई अच्छा काम नहीं कर रहे थे। देर से काम पर आते हैं और जल्दी चले जाते हैं। यह देख कर दिलीप बाबु ने एक दिन रामू काका को काम पर न आने को कहा।

Best hindi story में रामू काका ने गांव वालों से क्या कहा?

रामू काका बहुत दुखी हुए, उसने गांव में जाकर गांव वालों से कहा कि सांप को छोड़ने की बात झूठ है। गांव वाले इसे झूठ समझकर रोज बगीचे में जाते थे। एक दिन पांच लोग रात को बगीचे में गये और सोचा कि ‘पेड़ काटकर लाया जाए।’

वे सभी पेड़ को काटने में व्यस्त थे। धीरे-धीरे एक अजगर सांप आया और एक के पैर को दबोच लिया। आदमी ने जोर से चिल्लाया। रात में किसी को कुछ नजर नहीं आता। हर कोई उसके पास पूछने के लिए दौड़ा कि क्या हुआ ! आदमी सांप सांप चिल्लाता है ।

रात के समय कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने जाकर सांप को कुल्हाड़ी से घायल कर दिया। सांप उस आदमी को छोड़ दिया। फिर भी वह आदमी सांप सांप चिल्ला रहा था। उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। उन्होंने सोचा, “हम चोरी करने क्यों गये थे।”

लकड़ी चोरों ने वहाँ से लौट कर रामू काका को पीटने लगे। चोरों ने पूछा, “रामू काका ने सांप न होने के बारे में झूठ क्यों बोला?” यह सुनकर रामू काका आश्चर्यचकित रह गये ! मैंने गांव वालों को अपने मालिक के नाम से क्यों झूट बोला?

रामू काका रात में धीरे-धीरे दिलीप बाबु के घर गये और दरवाजा  खटखटाये। दिलीप बाबु उठे और दरवाज़ा खोला! रामू काका “तुम्हें क्या हुआ”? रामू काका ने सब कुछ कहा। दिलीप बाबु ने मन में सोचा, ‘ईश्वर जो करते हैं वह प्राणियों के कल्याण के लिए करते हैं’ और घर के अंदर चले गए।

तब गांव के लोगों ने यह निर्णय लिया कि “वह किसी की बगीचे से कुछ नहीं चुराएंगे ।” जो मेहनत की कमाई होगी, वही खा कर खुश रहेंगे।”

उस दिन से रामपुर गांव में कुछ भी नहीं खोया। सभी खुश थे।

Best hindi story सांप और लकड़ी चोर की शिख –  खुद मेहनत करके कमाना सीखो,  चोरी करना मुसीबत को घर लाने जैसा है 

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Satya Yug ki Kahani – सत्य युग की कहानी

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satya yug ki kahani -bramha and narad muni

Satya Yug ki Kahani – सत्य युग की कहानी  :  यह कहानी सत्य युग की समय का है । पुराण युग के बारे में सुनकर हमें जितनी खुशी होती है उतनी ही हैरानी भी होती है। अतीत में, पहाड़ों के पंख होते थे। यह एक कहानी बताता है कि यह अब कैसे गायब हो गया है।

एक बार ब्रह्मा आसन पर बैठे हुए नरलोक के बारे में सोच रहे थे। इसी समय नारद ने ब्रह्मा जी के पास पहुँचे। वह ब्रह्मा जी के पास गये और बोला, “पिताजी! मेरा प्रणाम स्वीकार करें।”

ब्रह्मा जी  ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “बस! आने का अभिप्राय क्या है ?” नारद जी ने कहा, “भगवान्, आप सृष्टि के रचयिता हैं, लेकिन इस सृष्टि में कुछ अपवाद भी हैं, जो बहुत कुरूप हैं।”

नारद की यह बात सुनकर ब्रह्मा जी थोड़ा परेशान हुए और बोले, ‘बताओ वह क्या है?’ जब सृष्टि प्रारम्भ हुई तो कौन कहाँ रहेगा इसकी सूची तैयार करने के लिए विश्वकर्मा को देवलोक, नरलोक और पाताललोक भेजा गया था।”

ब्रह्मा जी की यह बात सुनकर नारद जी बोले- “मैं उस सूची के बारे में बात करने नहीं आया हूँ।”

एक दिन मैं नरलोक गया और वहां जो कुछ हुआ उसे देखकर कोई एक क्षण भी नहीं रुक सकता। यह सुनकर ब्रह्मा जी बोले, ‘क्या समस्या है बताओ, उसका निवारण किया जाएगा।’

नारद जी ने कहा, भगवन्! इतनी बड़ी-बड़ी कठोर चट्टानों और पेड़ों से युक्त पहाड़ों के शरीर पर पंख लगे हुए हैं, इसलिए वे उड़ रहे हैं और गाँवों और कस्बों पर बैठ रहे हैं। यह सब कुछ नष्ट कर देता है ।

एक दिन जब मैं आकाश की ओर जा रहा था तो एक पहाड़ उड़ता हुआ आया और मुझ  से टकरा गया। नतीजा यह हुआ कि मैं बेहोश हो गया ।

मैं कैलाश पर्वत पर जा गिरा । उस दौरान शिव जी तपस्या में बैठे थे। शिव जी ने अपनी तपस्या पूरी की और कमंडल पानी से मुझे बचाया।

Satya Yug ki Kahani में ब्रम्हा जी ने क्या किया

तब ब्रह्मा जी ने कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि पर्वत को पंख क्यों दिए गए थे? लोगों की भलाई के लिए काम करने को पंख दिये गये. जब एक क्षेत्र के लोगों ने घर बनाने के लिए उस पहाड़ से पत्थर, लकड़ी, मिट्टी और शरीर के लिए औषधीय जड़ी-बूटियाँ ले जाने से लाभ उठाया जा सके। उन्होंने वह स्थान छोड़ कर  और अन्य लोगों की मदद करने के लिए जाते थे ।  लेकिन ये तो बेतरतीब से घूम रहे हैं।’

यह सोचकर ब्रह्मा जी को कोई और रास्ता नहीं सूझा। उन्होंने तुरंत इंद्र को बुलाया और कहा, “तुम वज्र मार के पर्वतों के पंख काट दो।”

ब्रह्मा की यह बात सुनकर इन्द्र ने वज्र से पर्वतों के पंख काट दिये। उस दिन से वे कहीं और उड़ नहीं सके।

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Best Moral Hindi Story Santon ki Pariksha – संतों की परीक्षा

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Best Moral Hindi Story-संतों की परीक्षा –   बहुत पुरानी कहानी है। देवपुरी राज्य में एक आश्रम था। उस आश्रम में तीन साधु रहते थे। पहले संत का नाम संत रामदास था। दूसरे संत का नाम संत रामेश्वर  और तीसरे का नाम संत चिदानंद था।

संत रामदास और संत रामेश्वर हमेशा झगड़ते रहते थे। संत रामदास कहते थे कि वे सर्वश्रेष्ठ संत हैं। संत रामेश्वर भी कहते थे कि वे सर्वश्रेष्ठ संत हैं। लेकिन साधु चिदानंद उन्हें हमेशा समझाते थे। वे कहते थे कि इस संसार में संत ही सर्वश्रेष्ठ हैं।

यह सुनकर संत रामदास और संत रामेश्वर हंस पड़े और बोले – ‘क्या बात कर रहे हो चिदानंद? यदि आप अपने नाम के आगे संत शब्द लगाएंगे तो क्या आप हमारे जैसे संत हो सकते हैं? स्वयं को धार्मिकता सिद्ध करना आपकी कमजोरी है। दोनों संतों की बातें सुनकर संत चिदानंद ने कहा- ‘संत बनने के लिए ‘साधु’ शब्द का प्रयोग ही काफी नहीं है। अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा और सही कर्तव्य ही धर्म है।

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तीनों संतों की बातें स्वयं भगवान विष्णु ने सुनीं। एक दिन भगवान विष्णु तीनों संतों की परीक्षा लेने के लिए देवपुरी आश्रम में आये। भगवान स्वयं सामान्य रीति से आश्रम में आये।

उन्होंने कहा- मैं दिशाहीन पथिक हूँ । रास्ता भटक गया हूँ और इस आश्रम में पहुंच गया। तीनों ऋषियों ने कहा-यह हमारा सौभाग्य है। सेवा ही हमारा धर्म है। तुम आओ अपने हाथ-पैर धो लो और थोड़ा ठंडा पानी पी लो। तुम आराम महसूस करोगे।

संत रामदास पथिक को वापस अपनी कुटिया में ले गये। भगवान विष्णु ने कुछ देर वहीं विश्राम किया। तब संत रामदास ने कहा- पथिक महोदय, आपको भूख लगी होगी। हमारे आश्रम में तीन आम के पेड़ हैं और वह बहुत मीठे हैं। आइए भूख मिटाने के लिए आम खाएं।

तीनों संत और पथिक आश्रम के बगीचे में पहुंचे। संत रामदास एक बड़ा बांस लेकर आए और अपने आम के पेड़ की शाखाओं को पीटने लगे। पेड़ से आम गिरने लगे। पथिक ने एक आम उठाकर खाया और बोला- आप मेरे लिए मेहनत से आम तोड़े लेकिन आप के  पेड़ के आम इतने मीठे नहीं लगे।

तभी संत रामेश्वर एक बड़ी रस्सी लेकर आए और आम के डालीयों फांद कर वह उस रस्सी से अपने पेड़ की शाखाओं को हिलाने लगे। आम झड़ने लगे। पथिक ने आम उठाकर खा लिया। उसने कहा- मैं यह आम नहीं खा सकता। ये आम भी उतना मीठा नहीं है।

तब साधु चिदानंद अपने आम के पेड़ के पास गये। बड़ी कठिनाई से आम के पेड़ पर चढ़े। कुछ देर बाद अच्छे अच्छे  दो आम लेकर आम के पेड़ से नीचे उतरे।

संत रामदास और संत रामेश्वर ने उनसे कहा- तुम कितने मूर्ख हो। पथिक को आम खिलाने के लिए इतना समय लगा दिया ।  साधु चिदानंद ने कहा- यह आम का पेड़ मैंने अपने हाथों से लगाया है। मैं इसे आपकी तरह बांस से पिट पिट कर कष्ट देना नहीं चाहता था। एक को कष्ट देकर दूसरे को ख़ुशी नहीं दी जा सकती। और मैं अपने पेड़ का गला रस्सी से नहीं घोंट सकता। वह ऐसे दर्द देने की बजाय मेहमान को पानी पिलाकर संतुष्ट करना चाहिए । मैं स्वयं आम के पेड़ पर चढ़ गया और दो पके आम ले आया।

आम पथिक को जरूर खाने चाहिए। भगवान विष्णु ने दो आम खाये। उसने कहा- इस आम के पेड़ के आम बहुत मीठे हैं। ऐसा आम मैंने पहले कभी नहीं खाया। आप सचमुच महान हैं। दयालु चिदानंद ने यह सुने और संत रामदास और संत रामेश्वर बहुत क्रोधित हुए।

उन्होंने कहा- हे पथिक! हमारे पेड़ के आम भी कम मीठे नहीं हैं । आप संत चिदानंद की अनावश्यक प्रशंसा करते हैं और हमारा अपमान करते हैं। आपका पक्षपातपूर्ण व्यवहार पूर्णतः अस्वीकार्य है।

भगवान विष्णु जी अपने मूल स्वरुप में आये  (Best Moral Hindi Story)

उसके बाद पथिक अपने मूल स्वरूप में आ गये। भगवान विष्णु स्वयं तीनों संतों के सामने प्रकट हुए। भगवान विष्णु ने कहा- हे मुनियों! मैंने आपकी सारी बातें सुनीं। मुझे आपकी विवेकशीलता का परीक्षण करने में रुचि है। और मैं पथिक के भेष में तुम्हारी पवित्रता की परीक्षा लेने आया था। मैं आपकी सेवा से संतुष्ट हूं।

लेकिन रामदास और रामेश्वर संत बनने के योग्य नहीं हैं। तुम्हारे हृदय में दया नहीं है। केवल ईर्ष्या और निंदा से भरा हुआ है। लेकिन संत दयालु चिदानंद में असीम दया और प्रेम है। वह पेड़ों को वैसे ही देखता है जैसे वह मनुष्य को देखता है। मैं सब के शरीर में विद्यमान हूं।

जब रामदास ने आम के पेड़ को बांस से पीटा  मेरे शरीर पर बहुत सारे घाव हो गये जिससे मुझे बहुत दर्द हुआ था। आम इतने मीठे नहीं लगे। उसी प्रकार मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे रामेश्वर मेरी गर्दन में रस्सी डालकर और आम के पेड़ को खींचकर मेरा गला घोंट रहा है। लेकिन फिर, जब साधु चिदानंद एक पेड़ पर चढ़ गए और मेरे लिए दो पके आम लाए, तो मेरे शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ। वह न तो लालची है और न ही हिंसक। पेड़ के प्रति उसका स्नेह और प्रेम अनंत है ।

दयालु चिदानंद की ऐसी सेवा से, मैं आपके द्वारा उत्पन्न सभी कष्टों को दूर करने में सक्षम हो गया। तब भगवान विष्णु ने कहा- केवल संत चिदानंद ही संत पद के पात्र हैं। सिर्फ संत शब्द लगा देने से कोई संत नहीं हो जाता। संत बनने के लिए सबसे पहले मन और हृदय में दया, प्रेम और सेवा भाव का होना जरूरी है, जो संत चिदानंद के शरीर में कूट-कूट कर भरा है।

इसलिये आज से संत दयालु चिदानंद  जिन्दगी भर  संत रहेंगे और आप दोनों संत दयालु चिदानंद के सेवक रहेंगे। यह सुनकर रामदास और रामेश्वर को अपनी गलती का एहसास हुआ। भगवान विष्णु ने उन्हें क्षमा प्रदान कर दी। उन्होंने प्रभु की शरण ली। अपने शेष जीवन में, संत चिदानंद ने दुनिया की भलाई के लिए काम किया।

 

इस कहानी की शिख – एक को  कष्ट देकर दुसरे को  ख़ुशी  नहीं दी जा सकती ।  हमेशा अपने मन में दया का भाव रखना चाहिए , तभी तुम अच्छे इन्सान बन पाओगे ।

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