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Facts in Hindi – Platypus new – प्लैटिपस

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प्लैटिपस के रोचक तथ्य – facts in hindi

ऑस्ट्रेलिया के विचित्र प्राणीयों में से एक है प्लैटिपस। प्लैटिपस विचित्र इस लिए है की, इसमें पक्षीयों के और जानवरों का मिलाजुला गुण है। प्लैटिपस के पूंछ चप्पू के आकार की होती है। बत्तख की तरह चोंच, उदबिलाव जैसा चिकना रोयेंदार शरीर  पानी में तैर ने के लिये जाल वाले चार पैर हैं। यह विचित्र जिव ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते है।

वयस्क प्लैटिपस की लम्बाई लगभग ३0 इंच की होती है और मादा प्लैटिपस की लम्बाई लगभग 27 इंच तक होती है। वयस्क प्लैटिपस का वजन लगभग 3 किलोग्राम और मादा प्लैटिपस की लगभग 2.5 किलोग्राम होती है।

हमारे शोधकर्ताओं को एक प्लैटिपस जीवाश्म मिला है की प्राचीन प्लैटिपस लम्बाई वर्त्तमान के रह रहे प्लैटिपस से काफी बड़े थे लगभग 3.5 फीट और वजन शायद 5 किलोग्राम से ज्यादा थे।

प्लैटिपस में घना, मोटा फर होता है जो उन्हें पानी के भीतर गर्म रखने में मदद करता है। प्रत्येक आंख के पास हल्के फर के एक टुकड़े और नीचे की ओर हल्के रंग के फर को छोड़कर, अधिकांश फर गहरे भूरे रंग का होता है।

प्लैटिपस ज्यादातर पानी में समय गुजारता है। उनका मोटा भूरा फर उनको पानी के अन्दर गर्म रखता है। पानी में तैरने की समय उनका पिछले पूँछ को चप्पू की तरह इस्तेमाल करते हैं। प्लैटिपस की चोंच बत्तख की चोंच जैसी होती है और उनकी बनावट चिकनी होती है। उनके त्वचा के अन्दर  हजारों सम्बेदनशील रिसेप्टर्स होते हैं ।

facts in hindi - platypus vector image

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जो प्लैटिपस को पानी के नीचे नेविगेट करने और झींगा जैसे संभावित भोजन की गतिविधि का पता लगाने में मदद करते हैं।

प्लैटिपस ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी विक्टोरिया से लेकर  उत्तर में क्वींसलैंड के कुकटाउन तक फैला हुआ है। जिस से पता चलता है की पूर्व और दक्षीण तट पर  भारी  मात्रा में  दिखाई पड़ते हैं।

यह जीव तस्मानिया, किंग द्वीप और कंगारू द्वीप पर पायें जाते हैं । ये नदियों, तालाबों के साथ छोटे छोटे झरनाओं में रहा करते हैं। भोजन की तलाश में रात में  लगभग 11 से 13 घंटे तक पानी में समय अतिबाहित करते हैं। वें रात और शाम के समय अधिक सक्रिय हो जाते है क्यूँ की वे रात्रिचर होते हैं।

प्लैटिपस मांसाहारी जीव है, झींगे, केकड़ा, मछली, छोटे मोटे कीड़े मकोड़े आदी खाता है। दिन में शिकारीयों से बचने के लिए नदी नालों के किनारों पर बिलों में छुप जाता है। यह मिटटी खोदने में माहिर है । यह अपना बिल खुद बना लेता है। उनका  मिटटी का सुरंग अंडाकार होता है। शोधकर्त्ताओं को ठन्डे पहाड़ों में पाए गए है। शर्दियों में उनका अतिरिक्त फैट अपने पूँछ पर जमा कर लेते हैं। और बाद में जरूरत पड़ने पर उन्हें काम में लगाते  हैं।

जब प्लैटिपस को कोई दिलचस्प चीज़ मिलती है, जैसे कि कीड़ों का लार्वा, तो वे उसे अपने बिलों में जमा कर लेते हैं, अपनी गाल की थैलियों में जमा कर लेते हैं और सतह पर तैरने लगते हैं। प्लैटिपस झींगा, तैरने वाले भृंग, पानी के कीड़े और टैडपोल, साथ ही कभी-कभी कीड़े, मीठे पानी के मटर मसल्स या घोंघे भी खाते हैं।

Amazing facts in hindi – प्लैटिपस की अद्भुत  जानकारी

facts in hindi - platypus

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प्लैटिपस 20 सेकंड से 150 सेकंड तक अपनी साँस रोक कर गहरे पानी में गोता लगाते हैं।

प्लैटिपस ऐसा एक जीव है जो अंडा देती है और स्तन्यपान भी कराती है। जब मादा प्लैटिपस अपने बच्चों को जन्म देने के लिए तैयार होती हैं, तो वे नदी के किनारे जमीन के अंदर दब जाती हैं और खुद को सुरंगनुमा कमरों में बंद कर लेती हैं।

फिर प्रत्येक मादा एक से तीन अंडे देती है और उन्हें गर्म रखने के लिए अपनी दुम और अपनी पूंछ के बीच रखती है। लगभग 10 से 12 दिनों के बाद, अंडे फूटते हैं और एक समान के आकार के बच्चे अपने बिल के अंदर तीन से चार महीने तक दूध पीते हैं। प्लैटिपस के बच्चे दूध छुड़ाने के बाद उसके बच्चे पानी में आसानी से तैर सकते हैं।

वर्त्तमान रूप से प्लैटिपस अब खतरे में नहीं है। पर आनेवाली भविष्य में जलवायु प्रदुषण के कारण उनकी प्रजाति खतरे में आ सकती है।

प्लैटिपस के कुछ रोचक तथ्य – (facts in hindi)

फास्ट फैक्ट्स : प्लैटिपस कुछ विषैले स्तनधारीयों में से एक है। नर प्लैटिपस के पिछले पैर पर एक स्पर होता है, जो जहर  स्रावित करने वाली ग्रंथि से मिश्रित है। नर मादा मिलन के मौसन के दौरान अत्यधिक जहर स्रावित होता है। जीवविज्ञानीओं को  ये लगता है की स्पर्स और जहर पुरुषों को साथी के लिए प्रतिस्पर्धा करने में मदद करते हैं। यह जहरीला तत्व इंसानों के लिए जानलेवा नहीं है, पर गंभीर रूप से सुजन और असहनीय दर्द हो सकता है।

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Facts in Hindi – Electric Eel Fish – इलेक्ट्रिक ईल

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Facts in Hindi – Electric Eel Fish – इलेक्ट्रिक ईल

इस धरती पर एक अनोखा जीव पाई जाती है जो अपने शरीर में से अपने आप बिजली पैदा करती है। इसका नाम इलेक्ट्रिक ईल है। यह अमेरिका के मध्य और निचले अमेज़न और ओरिनोका नदी के घाटीयों में पायें जाते हैं।

वह गंदे तालाब और शांत जलधाराओं में भी देखने को मिलता है। शोधकर्त्ताओं को भारत में मोरे ईल कि एक नई प्रजाति की  खोज कुड्डालोर तट पर पाई गयी है। इस प्रजाति का नाम तमिलनाडु ब्राउन मोरे रखा गया है।

इलेक्ट्रिक इल का शारीरिक गठन (facts in hindi) :

इलेक्ट्रिक इल का शरीर  पतला , चपटा , सांप जैसा शिर  होता है। चमड़ी इसका मोटी और परत रहित त्वचा साधारण तौर पर गहरे भूरे रंग का होते हैं। इसके निचे की और सामान्य नारंगी रंग होता है। इन इलेक्ट्रिक ईल की पंख काफी छोटा होता है। बजाय इसके पीछे का पंख भी छोटा होता है, एक लम्बा गुदा पंख उसे पानी के माध्यम से पैंतरेबाज़ी करने में मदद करता है, जहाँ वह आगे और पीछे तैर सकता है या शिकार की तलाश में मँडरा सकता है।

तिन विशेष विद्युत अंग (facts in hindi):

मुख्य विद्युत अंग हंटर का अंग और योंन अंग ईल के शरीर  का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बनाते है। विद्युत अंग मजबूत और कमजोर विद्युत आवेश बनाते हैं, जिनका उपयोग रक्षा, शिकार, संचार और नेविगेशन के लिए किया जाता है। इस मछली के लिए मजबूत विद्युत आवेश ऊर्जावान रूप से थका देने वाला हो सकता है। सबसे ज्यादा बिजली आगे के अंग से उत्पन करता है और उसका शेष भाग कमजोर  बिजली निर्वाहन करते है। इसका लम्बाई 5 से 8 फीट तक बढता है।

electric eel on amazon river

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इलेक्ट्रिक ईल का मूल निवास स्थान (Facts in Hindi):

इलेक्ट्रिक ईल दक्षिण अमेरिका में भारी मात्रा में पाई जाती हैं।  यह ब्राज़ील, कोलम्बिया, इक्वाडोर और पेरू तक पाई जाती हैं। इस प्रजाति अमेज़न और ओरिनोको नदियों, झीलों, झरनों, बाढ़ वाले जंगल में, मटमैला पानी में धीमा गति से बहने वाला पानी में उसका बेहतरीन निवास स्थान है। बाढ़ के दौरान सारे जंगल और तालाबो में फैल जाता  है।

शुष्क मौसम के दौरान, इलेक्ट्रिक ईल को बड़े स्तनधारियों जैसे शिकारियों से भी अधिक खतरा होता है, जो इसके रहने वाले उथले पानी के बाहर से शिकार करते हैं। चूँकि पीछे हटने के लिए बहुत कम जगह होती है, मछली को अक्सर अपना बचाव करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

इलेक्ट्रिक ईल पानी में कुशलता से बिजली का संचालन करता है,  जिस से इलेक्ट्रिक ईल के लिए एक बड़ी सी सतह क्षेत्र उपलब्ध होता है। इसका मतलब यह है कि पानी के माध्यम से दिया गया इलेक्ट्रिक पल्स किसी बड़े शिकारी के लिए दर्दनाक हो सकता है। पानी में रह रहे शिकारी के साथ सीधे उसको बिजली के झटके देकर उसको अचेत कर सकती है।

इलेक्ट्रिक ईल का संचार प्रणाली (Facts in Hindi) :

इलेक्ट्रिक ईल सम्बेदनशील बिजली उत्पन करके एक दुसरे के साथ संचार प्रणाली में उपयोग करते है। वे सम्बेदनशील बिजली उत्पन करके अपनी स्थिति जाहिर करते है। यह मादा और नर के बिच भिन्न भिन्न होती है। इलेक्ट्रिक ईल इन संकेतो से पता लगाती है की पानी में अन्य कोई प्राणी महुजुद है या नहीं। वे अपने लिंग और योंन सम्बेदनशील के वारे में जानकारी दे सकते हैं, जो प्रजनन के मौसम के दौरान महत्वपूर्ण है।

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इलेक्ट्रिक ईल का भोजन (Facts in Hindi):

इलेक्ट्रिक ईल मांसाहारी होते है। छोटे छोटे कीड़े, मछली, उभयचर, सरीसृप अदि खाते हैं। नवजात ईल फाइटो प्लैंकटन और जू प्लैंकटन खा कर जिन्दा रहती हैं। बचाव के अलावा, इलेक्ट्रिक ईल शिकार करने के लिए अपनी चौंकाने वाली शक्ति का उपयोग करता है। वे जिस अंधेरे और गंदे पानी में रहते हैं, वहां शिकार को पहचानना मुश्किल हो सकता है।

अपने शिकार में सहायता के लिए, इलेक्ट्रिक ईल के शरीर पर गति-संवेदनशील बाल होते हैं जो आसपास के पानी में किसी भी मामूली दबाव परिवर्तन का पता लगा सकता हैं।

जब ईल को संदेह होता है कि कोई शिकार वस्तु पास में है, तो वह दो तीव्र विद्युत स्पंदनों  का उत्सर्जन करता है। यह दोहराव शिकार की मांसपेशियों को प्रभावित करता है, जिससे वह अनैच्छिक रूप से हिलने लगता है और इलेक्ट्रिक ईल को अपनी उपस्थिति के बारे में सचेत कर देता है।

उच्च-वोल्टेज झटके लगभग 500 वोल्ट की एक श्रृंखला के साथ, यह फिर अपने शिकार को पंगु बना देता है और खा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि मानव आँखों के लिए इसे विस्तार से देखना मुश्किल हो सकता है।

electric eel on Orinoco river

electric eel on Orinoco river

इलेक्ट्रिक ईल का प्रजनन और वंशबृद्धि (Facts in Hindi):

गर्मी यों के दिनों में इलेक्ट्रिक ईल 1400 से 1800 तक अंडे देती है। नर ईल अपने लार से घोसला बनाते है और बरसात की मौसम शुरू होने तक अंडो को रक्षा करते है। बरसात के मौसम में अंडे से बच्चे बहार निकल आते है। अंडे से बच्चे निकल ने की प्रक्रिया 60 से 70 प्रतिशत होती है।

इलेक्ट्रिक ईल का जीवन काल(Facts in Hindi):

इलेक्ट्रिक ईल का ओसत जीवन काल 10 से 15 साल तक जिन्दा रहता है और मादा इलेक्ट्रिक ईल 10 से 18 साल तक जिन्दा रहती है।

फ़ास्ट फैक्ट्स (Facts in Hindi) :  इलेक्ट्रिक ईल अन्य ईल की तुलना में कैटफ़िश से अधिक निकटतम सम्बंध है। इलेक्ट्रिक ईल को जब भी खतरा महसूस होता है तो 800 से 900 वोल्ट तक बिजली पैदा करने की शक्ति होता है। यह मध्य वयस्क मगरमच्छ को भी बिजली की झटके से मार सकता है।

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facts in hindi – कछुआ फैक्ट्स

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कछुआ एक  सरीसृप है । लाखों सालों से हमारे धरती पर रह रहा है । क्या आप जानते है दुनिया भर में सात अलग अलग प्रजातियों  के कछुए पाए जाते है । भारत में लगभग 5 अलग अलग प्रजातियां  पायी जाती है ।

     वह  समुन्दर में, घास के मैदान और गहेरे पानी में रहते है । इसका एक  दूसरा प्रजाति का हे जो जमीन पर रहता है । समुद्री कछुआ पानी में साँस नहीं ले सकता ।

      डॉलफिन की तरह  साँस लेने के लिये  पानी के ऊपर आना पड़ता है । कूछ कछुआ  अपना सर और पैर  अपने खोल के  अन्दर  वापस ले पाते है ।

समुद्री कछुआ के  imaging facts in hindi

   समुद्री कछुआ अक्सर रोता हुआ दिखाई पड़ता है इसलिए नहीं की वह दुखी है । ईसलिए,  अश्रुयों के ग्रंथियों से अतिरिक्त नमक निकाल ने के लिए रोता है ।  सभी कछुआ अलग अलग खाना  खाती है । कोई शाकाहारी तो कोई मांसाहारी ।

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 इनके  प्रजाति – facts in hindi 

१.लेदर बेक कछुआ  – यह लम्बी दूर की यात्रा करतें है और गहरे पानी में गोते लगाते है यह पृथ्वी में पाए जाने वाली सबसे बड़े कछुआ है ।

२.ग्रीन सी टर्टल – यह आकार में बड़े है और इनका बजन  150  किलोग्राम हो सकता है । इनका खोल दिल के आकार जैसा है । उसमें अनेक रंगों के होते है।

३. हॉक्स विल कछुआ – इसका मूहँ बाज पक्षी की तरह  होता है इनका शिकार  हस्तशिल्प के लिए करते हैं । यह धीरे धीरे बिलुप्त होने की कगार पर  है ।

४. लगर हेड कछुआ –  इनका नाम इनका बड़ा सर के कारण है। यह केकड़े, घोंगा आदि खाते  है । जो अपने शक्तिशाली जबड़ो से कुचल सकता है ।

५. अलिव रिडले कछुआ- यह कछुआ  छोटा प्रजाति का है । यह माइग्रेशन के लिए हजारो किलोमीटर का सफ़र तय करते है ।

६. Tortoise – इस कछुये का चारों पैर है। यह जमीनी कछुआ है यह घास और बनस्पतियों को खाकर जिन्दा रहती है ।

   अलिव रिडले कछुआ प्रजनन करने के लिये ओडिशा के समुद्र तट पर आते है । उसमें से गहिरमाथा और भितरकनिका प्रसिध्द है।  यह कछुआ  150 से 180 तक अंडे देति  हैं । और अंडे देने के बाद अपने अंडो को ढक कर वापस समुद्र में लौट जाती हैं ।

   कछुआ का अंडा मादा होगा या नर होगा इसके लिए बाताबरण  निर्धारण करता है । बाताबरण अगर गर्मी हो तो सारे अंडे मादा में परीबर्तित हो जायेंगी । अगर बाताबरण ठंडा हुआ तो सारे अंडे नर में

 परिबर्तित हो जायेगा । इसलिए यह कछुआ  ईस जगह का चयन करती है की  ना ज्यादा गर्मी हो ना ठंडा  इससे 50 भाग नर और  50 भाग मादा पैदा हो ।

    आज कल इंसानों के द्वारा किये गये कारणों से कछुआ जाती खतरे में है। हम सब को ऊन का संरक्षन करना होगा ।

Amazing Facts (facts in hindi )  –

    कछुआ एक ऐसा प्राणी है की, जो पैदा होने के बाद नहीं जान पाता  है की उसका माता पिता कौन है ? समुद्री कछुआ की उम्र लगभग 50 से 60 साल तक होती है, कुछ कछुआ  1200  मीटर तक गहरे पानी में गोता लगाती है ।

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